श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.10.8

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

योऽध्रुवेणात्मना नाथा न धर्मं न यशः पुमान्।

ईहेत भूतदयया स शोच्यः स्थावरैरपि॥ ८

yo'dhruveṇātmanā nāthā na dharmaṃ na yaśaḥ pumān|

īheta bhūtadayayā sa śocyaḥ sthāvarairapi|| 8

अर्थ

देवशिरोमणियो! जो मनुष्य इस विनाशी शरीरसे दुःखी प्राणियोंपर दया करके मुख्यतः धर्म और गौणतः यशका सम्पादन नहीं करता, वह जड़ पेड़-पौधोंसे भी गया-बीता है॥ ८॥

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