श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.11.2

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

विशीर्यमाणां पृतनामासुरीमसुरर्षभः।

कालानुकूलैस्त्रिदशैः काल्यमानामनाथवत्॥ २

viśīryamāṇāṃ pṛtanāmāsurīmasurarṣabhaḥ|

kālānukūlaistridaśaiḥ kālyamānāmanāthavat|| 2

अर्थ

वृत्रासुरने देखा कि समयकी अनुकूलताके कारण देवतालोग असुरोंकी सेनाको खदेड़ रहे हैं और वह इस प्रकार छिन्‍न-भिन्‍न हो रही है, मानो बिना नायककी हो॥ २॥

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