॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 6.12.13
आयुः श्रीः कीर्तिरैश्वर्यमाशिषः पुरुषस्य याः।
भवन्त्येव हि तत्काले यथानिच्छोर्विपर्ययाः॥ १३
āyuḥ śrīḥ kīrtiraiśvaryamāśiṣaḥ puruṣasya yāḥ|
bhavantyeva hi tatkāle yathānicchorviparyayāḥ|| 13
अर्थ
जिस प्रकार इच्छा न होनेपर भी समय विपरीत होनेसे मनुष्यको मृत्यु और अपयश आदि प्राप्त होते हैं—वैसे ही समयकी अनुकूलता होनेपर इच्छा न होनेपर भी उसे आयु, लक्ष्मी, यश और ऐश्वर्य आदि भोग भी मिल जाते हैं॥ १३॥