श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.12.16

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

पश्य मां निर्जितं शक्र वृक्णायुधभुजं मृधे।

घटमानं यथाशक्ति तव प्राणजिहीर्षया॥ १६

paśya māṃ nirjitaṃ śakra vṛkṇāyudhabhujaṃ mṛdhe|

ghaṭamānaṃ yathāśakti tava prāṇajihīrṣayā|| 16

अर्थ

देवराज इन्द्र! मुझे भी तो देखो; तुमने मेरा हाथ और शस्त्र काटकर एक प्रकारसे मुझे परास्त कर दिया है, फिर भी मैं तुम्हारे प्राण लेनेके लिये यथाशक्ति प्रयत्न कर ही रहा हूँ॥ १६॥

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