श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.12.19

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

इन्द्र उवाच

अहो दानव सिद्धोऽसि यस्य ते मतिरीदृशी।

भक्तः सर्वात्मनाऽऽत्मानं सुहृदं जगदीश्‍वरम्॥ १९

aho dānava siddho'si yasya te matirīdṛśī|

bhaktaḥ sarvātmanā''tmānaṃ suhṛdaṃ jagadīśvaram|| 19

अर्थ

देवराज इन्द्रने कहा—अहो दानवराज! सचमुच तुम सिद्ध पुरुष हो। तभी तो तुम्हारा धैर्य, निश्‍चय और भगवद्भाव इतना विलक्षण है। तुमने समस्त प्राणियोंके सुहृद‍् आत्मस्वरूप जगदीश्‍वरकी अनन्यभावसे भक्ति की है॥ १९॥

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