शत्रुदमन परीक्षित्! उस समय वृत्रासुरके शरीरसे उसकी आत्मज्योति बाहर निकली और इन्द्र आदि सब लोगोंके देखते-देखते सर्वलोकातीत भगवान्के स्वरूपमें लीन हो गयी॥ ३५॥
इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां षष्ठस्कन्धे वृत्रवधो नाम द्वादशोऽध्यायः॥ १२॥
वृत्रस्य देहान्निष्क्रान्तमात्मज्योतिररिन्दम।
पश्यतां सर्वलोकानामलोकं समपद्यत॥ ३५
शत्रुदमन परीक्षित्! उस समय वृत्रासुरके शरीरसे उसकी आत्मज्योति बाहर निकली और इन्द्र आदि सब लोगोंके देखते-देखते सर्वलोकातीत भगवान्के स्वरूपमें लीन हो गयी॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.12.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 764) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/12/35/