राजाने प्रत्युत्थान और अर्घ्य आदिसे उनकी विधिपूर्वक पूजा की। आतिथ्य-सत्कार हो जानेके बाद जब अंगिरा ऋषि सुखपूर्वक आसनपर विराज गये, तब राजा चित्रकेतु भी शान्तभावसे उनके पास ही बैठ गये॥ १५॥
तं पूजयित्वा विधिवत्प्रत्युत्थानार्हणादिभिः।
कृतातिथ्यमुपासीदत्सुखासीनं समाहितः॥ १५
राजाने प्रत्युत्थान और अर्घ्य आदिसे उनकी विधिपूर्वक पूजा की। आतिथ्य-सत्कार हो जानेके बाद जब अंगिरा ऋषि सुखपूर्वक आसनपर विराज गये, तब राजा चित्रकेतु भी शान्तभावसे उनके पास ही बैठ गये॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.14.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 769) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/14/15/