श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.14.39

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

ताः पर्यतप्यन्‍नात्मानं गर्हयन्त्योऽभ्यसूयया।

आनपत्येन दुःखेन राज्ञोऽनादरणेन च॥ ३९

tāḥ paryatapyannātmānaṃ garhayantyo'bhyasūyayā|

ānapatyena duḥkhena rājño'nādaraṇena ca|| 39

अर्थ

इस प्रकार एक तो वे रानियाँ सन्तान न होनेके कारण ही दुःखी थीं, दूसरे राजा चित्रकेतुने उनकी उपेक्षा कर दी। अतः वे डाहसे अपनेको धिक्कारने और मन-ही-मन जलने लगीं॥ ३९॥

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