श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.15.11

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

चरन्ति ह्यवनौ कामं ब्राह्मणा भगवत्प्रियाः।

मादृशां ग्राम्यबुद्धीनां बोधायोन्मत्तलिङ्गिनः॥ ११

caranti hyavanau kāmaṃ brāhmaṇā bhagavatpriyāḥ|

mādṛśāṃ grāmyabuddhīnāṃ bodhāyonmattaliṅginaḥ|| 11

अर्थ

मैं जानता हूँ कि बहुत-से भगवान्‌के प्यारे ब्रह्मवेत्ता मेरे-जैसे विषयासक्त प्राणियोंको उपदेश करनेके लिये उन्मत्तका-सा वेष बनाकर पृथ्वीपर स्वच्छन्द विचरण करते हैं॥ ११॥

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