श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.16.25

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

ॐ नमो भगवते महापुरुषाय महानुभावाय महाविभूतिपतये सकलसात्वतपरिवृढनिकरकरकमलकुड्मलोपलालितचरणारविन्दयुगल परम परमेष्ठिन्‍नमस्ते॥ २५॥

oṃ namo bhagavate mahāpuruṣāya mahānubhāvāya mahāvibhūtipataye sakalasātvataparivṛḍhanikarakarakamalakuḍmalopalālitacaraṇāravindayugala parama parameṣṭhinnamaste|| 25||

अर्थ

ॐकारस्वरूप महाप्रभावशाली महाविभूतिपति भगवान् महापुरुषको नमस्कार है। श्रेष्ठ भक्तोंका समुदाय अपने करकमलोंकी कलियोंसे आपके युगल चरणकमलोंकी सेवामें संलग्न रहता है। प्रभो! आप ही सर्वश्रेष्ठ हैं। मैं आपको बार-बार नमस्कार करता हूँ’॥ २५॥

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