॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 6.16.39
कामधियस्त्वयि रचिता
न परम रोहन्ति यथा करम्भबीजानि।
ज्ञानात्मन्यगुणमये
गुणगणतोऽस्य द्वन्द्वजालानि॥ ३९
kāmadhiyastvayi racitā
na parama rohanti yathā karambhabījāni|
jñānātmanyaguṇamaye
guṇagaṇato'sya dvandvajālāni|| 39
अर्थ
परमात्मन्! आप ज्ञानस्वरूप और निर्गुण हैं। इसलिये आपके प्रति की हुई सकाम भावना भी अन्यान्य कर्मोंके समान जन्म-मृत्युरूप फल देनेवाली नहीं होती, जैसे भुने हुए बीजोंसे अंकुर नहीं उगते। क्योंकि जीवको जो सुख-दुःख आदि द्वन्द्व प्राप्त होते हैं, वे सत्त्वादि गुणोंसे ही होते हैं, निर्गुणसे नहीं॥ ३९॥