॥ श्रीहरिः ॥
अतः पापीयसीं योनिमासुरीं याहि दुर्मते।
यथेह भूयो महतां न कर्ता पुत्र किल्बिषम्॥ १५
ataḥ pāpīyasīṃ yonimāsurīṃ yāhi durmate|
yatheha bhūyo mahatāṃ na kartā putra kilbiṣam|| 15
अर्थ
[चित्रकेतुको सम्बोधन कर] अतः दुर्मते! तुम पापमय असुरयोनिमें जाओ। ऐसा होनेसे बेटा! तुम फिर कभी किसी महापुरुषका अपराध नहीं कर सकोगे॥ १५॥
अतः पापीयसीं योनिमासुरीं याहि दुर्मते।
यथेह भूयो महतां न कर्ता पुत्र किल्बिषम्॥ १५
[चित्रकेतुको सम्बोधन कर] अतः दुर्मते! तुम पापमय असुरयोनिमें जाओ। ऐसा होनेसे बेटा! तुम फिर कभी किसी महापुरुषका अपराध नहीं कर सकोगे॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.17.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 788) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/17/15/