श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.18.2

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

सिद्धिर्भगस्य भार्याङ्ग महिमानं विभुं प्रभुम्।

आशिषं च वरारोहां कन्यां प्रासूत सुव्रताम्॥ २

siddhirbhagasya bhāryāṅga mahimānaṃ vibhuṃ prabhum|

āśiṣaṃ ca varārohāṃ kanyāṃ prāsūta suvratām|| 2

अर्थ

भगकी पत्‍नी सिद्धिने महिमा, विभु और प्रभु—ये तीन पुत्र और आशिष् नामकी एक कन्या उत्पन्‍न की। यह कन्या बड़ी सुन्दरी और सदाचारिणी थी॥ २॥

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