श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.18.21

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

इमे श्रद्दधते ब्रह्मन्‍नृषयो हि मया सह।

परिज्ञानाय भगवंस्तन्‍नो व्याख्यातुमर्हसि॥ २१

ime śraddadhate brahmannṛṣayo hi mayā saha|

parijñānāya bhagavaṃstanno vyākhyātumarhasi|| 21

अर्थ

ब्रह्मन्! मेरे साथ यहाँकी सभी ऋषिमण्डली यह बात जाननेके लिये अत्यन्त उत्सुक हो रही है। अतः आप कृपा करके विस्तारसे वह रहस्य बतलाइये॥ २१॥

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