श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.18.30

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

विलोक्यैकान्तभूतानि भूतान्यादौ प्रजापतिः।

स्त्रियं चक्रे स्वदेहार्धं यया पुंसां मतिर्हृता॥ ३०

vilokyaikāntabhūtāni bhūtānyādau prajāpatiḥ|

striyaṃ cakre svadehārdhaṃ yayā puṃsāṃ matirhṛtā|| 30

अर्थ

सृष्टिके प्रभातमें ब्रह्माजीने देखा कि सभी जीव असंग हो रहे हैं, तब उन्होंने अपने आधे शरीरसे स्त्रियोंकी रचना की और स्त्रियोंने पुरुषोंकी मति अपनी ओर आकर्षित कर ली॥ ३०॥

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