श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.18.37

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

दितिरुवाच

वरदो१ यदि मे ब्रह्मन् पुत्रमिन्द्रहणं वृणे।

अमृत्युं मृ२तपुत्राहं येन मे घातितौ सुतौ॥ ३७

varado yadi me brahman putramindrahaṇaṃ vṛṇe|

amṛtyuṃ mṛtaputrāhaṃ yena me ghātitau sutau|| 37

अर्थ

दितिने कहा—ब्रह्मन्! इन्द्रने विष्णुके हाथों मेरे दो पुत्र मरवाकर मुझे निपूती बना दिया है। इसलिये यदि आप मुझे मुँहमाँगा वर देना चाहते हैं तो कृपा करके एक ऐसा अमर पुत्र दीजिये, जो इन्द्रको मार डाले॥ ३७॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—दोऽसि यदि ब्रह्म०।

    (मुद्रित पृष्ठ 795)
  2. २

    प्रा० पा०—हतपुत्रा।

    (मुद्रित पृष्ठ 795)

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