धाताके छोटे भाईका नाम था—विधाता, उनकी पत्नी क्रिया थी। उससे पुरीष्य नामके पाँच अग्नियोंकी उत्पत्ति हुई। वरुणजीकी पत्नीका नाम चर्षणी था। उससे भृगुजीने पुनः जन्म ग्रहण किया। इसके पहले वे ब्रह्माजीके पुत्र थे॥ ४॥
अग्नीन् पुरीष्यानाधत्त क्रियायां समनन्तरः।
चर्षणी वरुणस्यासीद्यस्यां जातो भृगुः पुनः॥ ४
धाताके छोटे भाईका नाम था—विधाता, उनकी पत्नी क्रिया थी। उससे पुरीष्य नामके पाँच अग्नियोंकी उत्पत्ति हुई। वरुणजीकी पत्नीका नाम चर्षणी था। उससे भृगुजीने पुनः जन्म ग्रहण किया। इसके पहले वे ब्रह्माजीके पुत्र थे॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.18.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 792) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/18/4/