श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.18.68

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

दितिरुत्थाय ददृशे कुमाराननलप्रभान्।

इन्द्रेण सहितान् देवी पर्यतुष्यदनिन्दिता॥ ६८

ditirutthāya dadṛśe kumārānanalaprabhān|

indreṇa sahitān devī paryatuṣyadaninditā|| 68

अर्थ

जब दितिकी आँख खुली, तब उसने देखा कि उसके अग्‍निके समान तेजस्वी उनचास बालक इन्द्रके साथ हैं। इससे सुन्दर स्वभाववाली दितिको बड़ी प्रसन्‍नता हुई॥ ६८॥✎ 553

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #553 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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