जब दितिकी आँख खुली, तब उसने देखा कि उसके अग्निके समान तेजस्वी उनचास बालक इन्द्रके साथ हैं। इससे सुन्दर स्वभाववाली दितिको बड़ी प्रसन्नता हुई॥ ६८॥✎ 553
दितिरुत्थाय ददृशे कुमाराननलप्रभान्।
इन्द्रेण सहितान् देवी पर्यतुष्यदनिन्दिता॥ ६८
जब दितिकी आँख खुली, तब उसने देखा कि उसके अग्निके समान तेजस्वी उनचास बालक इन्द्रके साथ हैं। इससे सुन्दर स्वभाववाली दितिको बड़ी प्रसन्नता हुई॥ ६८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.18.68 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 799) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/18/68/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)