मैंने केवल एक ही पुत्रके लिये संकल्प किया था, फिर ये उनचास पुत्र कैसे हो गये? बेटा इन्द्र! यदि तुम्हें इसका रहस्य मालूम हो, तो सच-सच मुझे बतला दो। झूठ न बोलना’॥ ७०॥
एकः सङ्कल्पितः पुत्रः सप्त सप्ताभवन् कथम्।
यदि ते विदितं पुत्र सत्यं कथय मा मृषा॥ ७०
मैंने केवल एक ही पुत्रके लिये संकल्प किया था, फिर ये उनचास पुत्र कैसे हो गये? बेटा इन्द्र! यदि तुम्हें इसका रहस्य मालूम हो, तो सच-सच मुझे बतला दो। झूठ न बोलना’॥ ७०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.18.70 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 799) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/18/70/