श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.18.70

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

एकः सङ्कल्पितः पुत्रः सप्त सप्ताभवन् कथम्।

यदि ते विदितं पुत्र सत्यं कथय मा मृषा॥ ७०

ekaḥ saṅkalpitaḥ putraḥ sapta saptābhavan katham|

yadi te viditaṃ putra satyaṃ kathaya mā mṛṣā|| 70

अर्थ

मैंने केवल एक ही पुत्रके लिये संकल्प किया था, फिर ये उनचास पुत्र कैसे हो गये? बेटा इन्द्र! यदि तुम्हें इसका रहस्य मालूम हो, तो सच-सच मुझे बतला दो। झूठ न बोलना’॥ ७०॥

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