श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.18.76

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

तदिदं मम दौर्जन्यं बालिशस्य महीयसि।

क्षन्तुमर्हसि मातस्त्वं दिष्ट्या गर्भो मृतोत्थितः॥ ७६

tadidaṃ mama daurjanyaṃ bāliśasya mahīyasi|

kṣantumarhasi mātastvaṃ diṣṭyā garbho mṛtotthitaḥ|| 76

अर्थ

मेरी स्नेहमयी जननी! तुम सब प्रकार मेरी पूज्या हो। मैंने मूर्खतावश बड़ी दुष्टताका काम किया है। तुम मेरे अपराधको क्षमा कर दो। यह बड़े सौभाग्यकी बात है कि तुम्हारा गर्भ खण्ड-खण्ड हो जानेसे एक प्रकार मर जानेपर भी फिरसे जीवित हो गया॥ ७६॥✎ 1364

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1364 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): ७६ → ७६॥

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