॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 6.19.5
यथा त्वं कृपया भूत्या तेजसा महिनौजसा।
जुष्ट ईश गुणैः सर्वैस्ततोऽसि भगवान् प्रभुः॥ ५
yathā tvaṃ kṛpayā bhūtyā tejasā mahinaujasā|
juṣṭa īśa guṇaiḥ sarvaistato'si bhagavān prabhuḥ|| 5
अर्थ
मेरे आराध्यदेव! आप कृपा, विभूति, तेज, महिमा और वीर्य आदि समस्त गुणोंसे नित्ययुक्त हैं। इन्हीं भगों—ऐश्वर्योंसे नित्ययुक्त रहनेके कारण आपको भगवान् कहते हैं। आप सर्वशक्तिमान् हैं॥ ५॥✎ 556