॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 6.19.7
ॐ नमो भगवते महापुरुषाय महानुभावाय महाविभूतिपतये सह महाविभूतिभिर्बलिमुपहराणीति। अनेनाहरहर्मन्त्रेण विष्णोरावाहनार्घ्यपाद्योपस्पर्शनस्नानवासउपवीतविभूषणगन्धपुष्पधूपदीपोपहाराद्युपचारांश्च समाहित उपाहरेत्॥ ७॥
oṃ namo bhagavate mahāpuruṣāya mahānubhāvāya mahāvibhūtipataye saha mahāvibhūtibhirbalimupaharāṇīti| anenāharaharmantreṇa viṣṇorāvāhanārghyapādyopasparśanasnānavāsaüpavītavibhūṣaṇagandhapuṣpadhūpadīpopahārādyupacārāṃśca samāhita upāharet|| 7||
अर्थ
परीक्षित्! इस प्रकार स्तुति करके एकाग्रचित्तसे ‘ॐ नमो भगवते महापुरुषाय महानुभावाय महाविभूतिपतये सह महाविभूतिभिर्बलिमुपहराणि।’ ‘ओंकारस्वरूप, महानुभाव, समस्त महाविभूतियोंके स्वामी भगवान् पुरुषोत्तमको और उनकी महाविभूतियोंको मैं नमस्कार करती हूँ और उन्हें पूजोपहारकी सामग्री समर्पण करती हूँ’—इस मन्त्रके द्वारा प्रतिदिन स्थिर चित्तसे विष्णुभगवान्का आवाहन, अर्घ्य, पाद्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, आभूषण, गन्ध, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य आदि निवेदन करके पूजन करे॥ ७॥