निष्पाप परीक्षित्! भगवान्के पार्षदोंने देखा कि अजामिल कुछ कहना चाहता है, तब वे सहसा उसके सामने ही वहीं अन्तर्धान हो गये॥ २३॥✎ 497
तं विवक्षुमभिप्रेत्य महापुरुषकिङ्कराः।
सहसा पश्यतस्तस्य तत्रान्तर्दधिरेऽनघ॥ २३
निष्पाप परीक्षित्! भगवान्के पार्षदोंने देखा कि अजामिल कुछ कहना चाहता है, तब वे सहसा उसके सामने ही वहीं अन्तर्धान हो गये॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.2.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 709) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/2/23/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)