श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.2.29

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

सोऽहं व्यक्तं पतिष्यामि नरके भृशदारुणे।

धर्मघ्नाः कामिनो यत्र विन्दन्ति यमयातनाः॥ २९

so'haṃ vyaktaṃ patiṣyāmi narake bhṛśadāruṇe|

dharmaghnāḥ kāmino yatra vindanti yamayātanāḥ|| 29

अर्थ

मैं अब अवश्य ही अत्यन्त भयावने नरकमें गिरूँगा, जिसमें गिरकर धर्मघाती पापात्मा कामी पुरुष अनेकों प्रकारकी यमयातना भोगते हैं॥ २९॥✎ 497

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #497 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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