॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 6.2.48
न वै स नरकं याति नेक्षितो यमकिङ्करैः।
यद्यप्यमङ्गलो मर्त्यो विष्णुलोके महीयते॥ ४८
na vai sa narakaṃ yāti nekṣito yamakiṅkaraiḥ|
yadyapyamaṅgalo martyo viṣṇuloke mahīyate|| 48
अर्थ
परीक्षित्! यह इतिहास अत्यन्त गोपनीय और समस्त पापोंका नाश करनेवाला है। जो पुरुष श्रद्धा और भक्तिके साथ इसका श्रवण-कीर्तन करता है, वह नरकमें कभी नहीं जाता। यमराजके दूत तो आँख उठाकर उसकी ओर देखतक नहीं सकते। उस पुरुषका जीवन चाहे पापमय ही क्यों न रहा हो, वैकुण्ठलोकमें उसकी पूजा होती है॥ ४७-४८॥