श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.3.10

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

तांस्ते वेदितुमिच्छामो यदि नो मन्यसे क्षमम्।

नारायणेत्यभिहिते मा भैरित्याययुर्द्रुतम्॥ १०

tāṃste veditumicchāmo yadi no manyase kṣamam|

nārāyaṇetyabhihite mā bhairityāyayurdrutam|| 10

अर्थ

हम आपसे उनका रहस्य जानना चाहते हैं। यदि आप हमें सुननेका अधिकारी समझें तो कहें। प्रभो! बड़े ही आश्‍चर्यकी बात हुई कि इधर तो अजामिलके मुँहसे ‘नारायण!’ यह शब्द निकला और उधर वे ‘डरो मत, डरो मत!’ कहते हुए झटपट वहाँ आ पहुँचे॥ १०॥

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