प्रजापति दक्षने इन्द्रियातीत भगवान्की ‘हंसगुह्य’ नामक स्तोत्रसे स्तुति की थी। उसीसे भगवान् उनपर प्रसन्न हुए थे। मैं तुम्हें वह स्तुति सुनाता हूँ॥ २२॥✎ 509510
अस्तौषीद्धंसगुह्येन भगवन्तमधोक्षजम्।
तुभ्यं तदभिधास्यामि कस्यातुष्यद् यतो हरिः॥ २२
प्रजापति दक्षने इन्द्रियातीत भगवान्की ‘हंसगुह्य’ नामक स्तोत्रसे स्तुति की थी। उसीसे भगवान् उनपर प्रसन्न हुए थे। मैं तुम्हें वह स्तुति सुनाता हूँ॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.4.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 719) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/4/22/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)