श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.4.8

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

अहो प्रजापतिपतिर्भगवान् हरिरव्ययः।

वनस्पतीनोषधीश्‍च ससर्जोर्जमिषं विभुः॥ ८

aho prajāpatipatirbhagavān hariravyayaḥ|

vanaspatīnoṣadhīśca sasarjorjamiṣaṃ vibhuḥ|| 8

अर्थ

महात्मा प्रचेताओ! प्रजापतियोंके अधिपति अविनाशी भगवान् श्रीहरिने सम्पूर्ण वनस्पतियों और ओषधियोंको प्रजाके हितार्थ उनके खान-पानके लिये बनाया है॥ ८॥

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