श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.5.21

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

इति व्यवसिता राजन् हर्यश्वा एकचेतसः।

प्रययुस्तं परिक्रम्य पन्थानमनिवर्तनम्॥ २१

iti vyavasitā rājan haryaśvā ekacetasaḥ|

prayayustaṃ parikramya panthānamanivartanam|| 21

अर्थ

परीक्षित्! हर्यश्वोंने एक मतसे यही निश्‍चय किया और नारदजीकी परिक्रमा करके वे उस मोक्षपथके पथिक बन गये, जिसपर चलकर फिर लौटना नहीं पड़ता॥ २१॥

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