परीक्षित्! जब दक्षप्रजापतिको मालूम हुआ कि मेरे शीलवान् पुत्र नारदके उपदेशसे कर्तव्यच्युत हो गये हैं, तब वे शोकसे व्याकुल हो गये। उन्हें बड़ा पश्चात्ताप हुआ। सचमुच अच्छी सन्तानका होना भी शोकका ही कारण है॥ २३॥✎ 513
नाशं निशम्य पुत्राणां नारदाच्छीलशालिनाम्।
अन्वतप्यत कः शोचन् सुप्रजस्त्वं शुचां पदम्॥ २३
परीक्षित्! जब दक्षप्रजापतिको मालूम हुआ कि मेरे शीलवान् पुत्र नारदके उपदेशसे कर्तव्यच्युत हो गये हैं, तब वे शोकसे व्याकुल हो गये। उन्हें बड़ा पश्चात्ताप हुआ। सचमुच अच्छी सन्तानका होना भी शोकका ही कारण है॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.5.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 727) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/5/23/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)