श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.5.23

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

नाशं निशम्य पुत्राणां नारदाच्छीलशालिनाम्।

अन्वतप्यत कः शोचन् सुप्रजस्त्वं शुचां पदम्॥ २३

nāśaṃ niśamya putrāṇāṃ nāradācchīlaśālinām|

anvatapyata kaḥ śocan suprajastvaṃ śucāṃ padam|| 23

अर्थ

परीक्षित्! जब दक्षप्रजापतिको मालूम हुआ कि मेरे शीलवान् पुत्र नारदके उपदेशसे कर्तव्यच्युत हो गये हैं, तब वे शोकसे व्याकुल हो गये। उन्हें बड़ा पश्चात्ताप हुआ। सचमुच अच्छी सन्तानका होना भी शोकका ही कारण है॥ २३॥✎ 513

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #513 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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