वे भी अपने पिता दक्षप्रजापतिकी आज्ञा पाकर प्रजासृष्टिके उद्देश्यसे तप करनेके लिये उसी नारायणसरोवरपर गये, जहाँ जाकर उनके बड़े भाइयोंने सिद्धि प्राप्त की थी॥ २५॥✎ 513
तेऽपि पित्रा समादिष्टाः प्रजासर्गे धृतव्रताः।
नारायणसरो जग्मुर्यत्र सिद्धाः स्वपूर्वजाः॥ २५
वे भी अपने पिता दक्षप्रजापतिकी आज्ञा पाकर प्रजासृष्टिके उद्देश्यसे तप करनेके लिये उसी नारायणसरोवरपर गये, जहाँ जाकर उनके बड़े भाइयोंने सिद्धि प्राप्त की थी॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.5.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 727) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/5/25/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)