श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.6.4

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

भानुर्लम्बा ककुब्जामिर्विश्वा साध्या मरुत्वती।

वसुर्मुहूर्ता सङ्कल्पा धर्मपत्न्यः सुतान् शृणु॥ ४

bhānurlambā kakubjāmirviśvā sādhyā marutvatī|

vasurmuhūrtā saṅkalpā dharmapatnyaḥ sutān śṛṇu|| 4

अर्थ

धर्मकी दस पत्नियाँ थीं—भानु, लम्बा, ककुभ्, जामि, विश्वा, साध्या, मरुत्वती, वसु, मुहूर्ता और संकल्पा। इनके पुत्रोंके नाम सुनो॥ ४॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें