परीक्षित्! देवराज इन्द्र इस प्रकार सोच ही रहे थे कि भगवान् बृहस्पतिजी अपने घरसे निकलकर योगबलसे अन्तर्धान हो गये॥ १६॥
एवं चिन्तयतस्तस्य मघोनो भगवान् गृहात्।
बृहस्पतिर्गतोऽदृष्टां गतिमध्यात्ममायया॥ १६
परीक्षित्! देवराज इन्द्र इस प्रकार सोच ही रहे थे कि भगवान् बृहस्पतिजी अपने घरसे निकलकर योगबलसे अन्तर्धान हो गये॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.7.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 735) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/7/16/