श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.8.14

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

दुर्गेष्वटव्याजिमुखादिषु प्रभुः

पायान्‍नृसिंहोऽसुरयूथपारिः ।

विमुञ्चतो यस्य महाट्टहासं

दिशो विनेदुर्न्यपतंश्‍च गर्भाः॥ १४

durgeṣvaṭavyājimukhādiṣu prabhuḥ

pāyānnṛsiṃho'surayūthapāriḥ |

vimuñcato yasya mahāṭṭahāsaṃ

diśo vinedurnyapataṃśca garbhāḥ|| 14

अर्थ

जिनके घोर अट्टहाससे सब दिशाएँ गूँज उठी थीं और गर्भवती दैत्यपत्नियोंके गर्भ गिर गये थे, वे दैत्य-यूथपतियोंके शत्रु भगवान् नृसिंह किले, जंगल, रणभूमि आदि विकट स्थानोंमें मेरी रक्षा करें॥ १४॥

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