श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.8.34

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

विदिक्षु दिक्षूर्ध्वमधः समन्ता-

दन्तर्बहिर्भगवान् नारसिंहः।

प्रहापयँल्लोकभयं स्वनेन

स्वतेजसा ग्रस्तसमस्ततेजाः॥ ३४

vidikṣu dikṣūrdhvamadhaḥ samantā-

dantarbahirbhagavān nārasiṃhaḥ|

prahāpayam̐llokabhayaṃ svanena

svatejasā grastasamastatejāḥ|| 34

अर्थ

जो अपने भयंकर अट्टाहाससे सब लोगोंके भयको भगा देते हैं और अपने तेजसे सबका तेज ग्रस लेते हैं, वे भगवान् नृसिंह दिशा-विदिशामें, नीचे-ऊपर, बाहर-भीतर—सब ओर हमारी रक्षा करें’॥ ३४॥

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