श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.9.21

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

देवा ऊचुः

वाय्वम्बराग्न्यप्क्षितयस्त्रिलोका

ब्रह्मादयो ये वयमुद्विजन्तः।

हराम यस्मै बलिमन्तकोऽसौ

बिभेति यस्मादरणं ततो नः॥ २१

vāyvambarāgnyapkṣitayastrilokā

brahmādayo ye vayamudvijantaḥ|

harāma yasmai balimantako'sau

bibheti yasmādaraṇaṃ tato naḥ|| 21

अर्थ

देवताओंने भगवान्‌से प्रार्थना की—वायु, आकाश, अग्‍नि, जल और पृथ्वी—ये पाँचों भूत, इनसे बने हुए तीनों लोक उनके अधिपति ब्रह्मादि तथा हम सब देवता जिस कालसे डरकर उसे पूजा-सामग्रीकी भेंट दिया करते हैं, वही काल भगवान्‌से भयभीत रहता है। इसलिये अब भगवान् ही हमारे रक्षक हैं॥ २१॥✎ 519 520

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #519 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से
  • #520 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से

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