भगवान्के नेत्र शरत्कालीन कमलके समान खिले हुए थे। उनके साथ सोलह पार्षद उनकी सेवामें लगे हुए थे। वे देखनेमें सब प्रकारसे भगवान्के समान ही थे। केवल उनके वक्षःस्थलपर श्रीवत्सका चिह्न और गलेमें कौस्तुभमणि नहीं थी॥ २९॥✎ 521522
आत्मतुल्यैः षोडशभिर्विना श्रीवत्सकौस्तुभौ।
पर्युपासितमुन्निद्रशरदम्बुरुहेक्षणम् ॥ २९
भगवान्के नेत्र शरत्कालीन कमलके समान खिले हुए थे। उनके साथ सोलह पार्षद उनकी सेवामें लगे हुए थे। वे देखनेमें सब प्रकारसे भगवान्के समान ही थे। केवल उनके वक्षःस्थलपर श्रीवत्सका चिह्न और गलेमें कौस्तुभमणि नहीं थी॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.9.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 747) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/9/29/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)