श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.1.32

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

मातृष्वसेयो वश्चैद्यो दन्तवक्‍त्रश्‍च पाण्डव।

पार्षदप्रवरौ विष्णोर्विप्रशापात्पदाच्च्युतौ॥ ३२

mātṛṣvaseyo vaścaidyo dantavaktraśca pāṇḍava|

pārṣadapravarau viṣṇorvipraśāpātpadāccyutau|| 32

अर्थ

महाराज! फिर तुम्हारे मौसेरे भाई शिशुपाल और दन्तवक्‍त्र दोनों ही विष्णुभगवान्‌के मुख्य पार्षद थे। ब्राह्मणोंके शापसे इन दोनोंको अपने पदसे च्युत होना पड़ा था॥ ३२॥

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