श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.1.44

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

तत्रापि राघवो भूत्वा न्यहनच्छापमुक्तये।

रामवीर्यं श्रोष्यसि त्वं मार्कण्डेयमुखात् प्रभो॥ ४४

tatrāpi rāghavo bhūtvā nyahanacchāpamuktaye|

rāmavīryaṃ śroṣyasi tvaṃ mārkaṇḍeyamukhāt prabho|| 44

अर्थ

उस समय भी भगवान्‌ने उन्हें शापसे छुड़ानेके लिये रामरूपसे उनका वध किया। युधिष्ठिर! मार्कण्डेय मुनिके मुखसे तुम भगवान् श्रीरामका चरित्र सुनोगे॥ ४४॥✎ 578

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #578 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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