भोगके द्वारा पुण्यकर्मोंके फल और निष्काम पुण्यकर्मोंके द्वारा पापका नाश करते हुए समयपर शरीरका त्याग करके समस्त बन्धनोंसे मुक्त होकर तुम मेरे पास आ जाओगे। देवलोकमें भी लोग तुम्हारी विशुद्ध कीर्तिका गान करेंगे॥ १३॥✎ 625
भोगेन पुण्यं कुशलेन पापं
कलेवरं कालजवेन हित्वा।
कीर्तिं विशुद्धां सुरलोकगीतां
विताय मामेष्यसि मुक्तबन्धः॥ १३
भोगके द्वारा पुण्यकर्मोंके फल और निष्काम पुण्यकर्मोंके द्वारा पापका नाश करते हुए समयपर शरीरका त्याग करके समस्त बन्धनोंसे मुक्त होकर तुम मेरे पास आ जाओगे। देवलोकमें भी लोग तुम्हारी विशुद्ध कीर्तिका गान करेंगे॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.10.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 868) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/10/13/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#625 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीनृसिंहभगवान् ने → श्रीनृसिंहभगवान्ने