pitryaṃ ca sthānamātiṣṭha yathoktaṃ brahmavādibhiḥ|
mayyāveśya manastāta kuru karmāṇi matparaḥ|| 23
अर्थ
वत्स! तुम अपने पिताके पदपर स्थित हो जाओ और वेदवादी मुनियोंकी आज्ञाके अनुसार मुझमें अपना मन लगाकर और मेरी शरणमें रहकर मेरी सेवाके लिये ही अपने सारे कार्य करो॥ २३॥✎ 6262024
पित्र्यं च स्थानमातिष्ठ यथोक्तं ब्रह्मवादिभिः।
मय्यावेश्य मनस्तात कुरु कर्माणि मत्परः॥ २३
वत्स! तुम अपने पिताके पदपर स्थित हो जाओ और वेदवादी मुनियोंकी आज्ञाके अनुसार मुझमें अपना मन लगाकर और मेरी शरणमें रहकर मेरी सेवाके लिये ही अपने सारे कार्य करो॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.10.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 869) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/10/23/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#626 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीनृसिंहभगवान् ने → श्रीनृसिंहभगवान्ने