॥ श्रीहरिः ॥
ततः सम्पूज्य शिरसा ववन्दे परमेष्ठिनम्।
भवं प्रजापतीन्देवान्प्रह्रादो भगवत्कलाः॥ ३२
tataḥ sampūjya śirasā vavande parameṣṭhinam|
bhavaṃ prajāpatīndevānprahrādo bhagavatkalāḥ|| 32
अर्थ
इसके बाद प्रह्लादजीने भगवत्स्वरूप ब्रह्मा-शंकरकी तथा प्रजापति और देवताओंकी पूजा करके उन्हें माथा टेककर प्रणाम किया॥ ३२॥
ततः सम्पूज्य शिरसा ववन्दे परमेष्ठिनम्।
भवं प्रजापतीन्देवान्प्रह्रादो भगवत्कलाः॥ ३२
इसके बाद प्रह्लादजीने भगवत्स्वरूप ब्रह्मा-शंकरकी तथा प्रजापति और देवताओंकी पूजा करके उन्हें माथा टेककर प्रणाम किया॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.10.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 870) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/10/32/