evaṃ tau pārṣadau viṣṇoḥ putratvaṃ prāpitau diteḥ|
hṛdi sthitena hariṇā vairabhāvena tau hatau|| 35
अर्थ
युधिष्ठिर! इस प्रकार भगवान्के वे दोनों पार्षद जय और विजय दितिके पुत्र दैत्य हो गये थे। वे भगवान्से वैरभाव रखते थे। उनके हृदयमें रहनेवाले भगवान्ने उनका उद्धार करनेके लिये उन्हें मार डाला॥ ३५॥✎ 629630
एवं तौ पार्षदौ विष्णोः पुत्रत्वं प्रापितौ दितेः।
हृदि स्थितेन हरिणा वैरभावेन तौ हतौ॥ ३५
युधिष्ठिर! इस प्रकार भगवान्के वे दोनों पार्षद जय और विजय दितिके पुत्र दैत्य हो गये थे। वे भगवान्से वैरभाव रखते थे। उनके हृदयमें रहनेवाले भगवान्ने उनका उद्धार करनेके लिये उन्हें मार डाला॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.10.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 870) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/10/35/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)