taiḥ spṛṣṭā vyasavaḥ sarve nipetuḥ sma puraukasaḥ|
tānānīya mahāyogī mayaḥ kūparase'kṣipat|| 59
अर्थ
उनके स्पर्शसे सभी विमानवासी निष्प्राण होकर गिर पड़े। महामायावी मय बहुत-से उपाय जानता था, वह उन दैत्योंको उठा लाया और अपने बनाये हुए अमृतके कुएँमें डाल दिया॥ ५९॥
तैः स्पृष्टा व्यसवः सर्वे निपेतुः स्म पुरौकसः।
तानानीय महायोगी मयः कूपरसेऽक्षिपत्॥ ५९
उनके स्पर्शसे सभी विमानवासी निष्प्राण होकर गिर पड़े। महामायावी मय बहुत-से उपाय जानता था, वह उन दैत्योंको उठा लाया और अपने बनाये हुए अमृतके कुएँमें डाल दिया॥ ५९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.10.59 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 873) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/10/59/