श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.10.66

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

धर्मज्ञानविरक्त्यृद्धितपोविद्याक्रियादिभिः।

रथं सूतं ध्वजं वाहान्धनुर्वर्म शरादि यत्॥ ६६

dharmajñānaviraktyṛddhitapovidyākriyādibhiḥ|

rathaṃ sūtaṃ dhvajaṃ vāhāndhanurvarma śarādi yat|| 66

अर्थ

उन्होंने धर्मसे रथ, ज्ञानसे सारथि, वैराग्यसे ध्वजा, ऐश्‍वर्यसे घोड़े, तपस्यासे धनुष, विद्यासे कवच, क्रियासे बाण और अपनी अन्यान्य शक्तियोंसे अन्यान्य वस्तुओंका निर्माण किया॥ ६६॥

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