श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.11.27

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

कामैरुच्चावचैः साध्वी प्रश्रयेण दमेन च।

वाक्यैः सत्यैः प्रियैः प्रेम्णा काले काले भजेत् पतिम्॥ २७

kāmairuccāvacaiḥ sādhvī praśrayeṇa damena ca|

vākyaiḥ satyaiḥ priyaiḥ premṇā kāle kāle bhajet patim|| 27

अर्थ

अपने पतिदेवकी छोटी-बड़ी इच्छाओंको समयके अनुसार पूर्ण करे। विनय, इन्द्रिय-संयम, सत्य एवं प्रिय वचनोंसे प्रेमपूर्वक पतिदेवकी सेवा करे॥ २७॥

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