॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 7.12.18
न कृष्टपच्यमश्नीयादकृष्टं चाप्यकालतः।
अग्निपक्वमथामं वा अर्कपक्वमुताहरेत्॥ १८
na kṛṣṭapacyamaśnīyādakṛṣṭaṃ cāpyakālataḥ|
agnipakvamathāmaṃ vā arkapakvamutāharet|| 18
अर्थ
वानप्रस्थ-आश्रमीको जोती हुई भूमिमें उत्पन्न होनेवाले चावल, गेहूँ आदि अन्न नहीं खाने चाहिये। बिना जोते पैदा हुआ अन्न भी यदि असमयमें पका हो, तो उसे भी न खाना चाहिये। आगसे पकाया हुआ या कच्चा अन्न भी न खाय। केवल सूर्यके तापसे पके हुए कन्द, मूल, फल आदिका ही सेवन करे॥ १८॥