श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.12.24

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

आत्मन्यग्नीन् समारोप्य संन्यस्याहंममात्मताम्।

कारणेषु न्यसेत् सम्यक् संघातं तु यथार्हतः॥ २४

ātmanyagnīn samāropya saṃnyasyāhaṃmamātmatām|

kāraṇeṣu nyaset samyak saṃghātaṃ tu yathārhataḥ|| 24

अर्थ

अनशनके पूर्व ही वह अपने आहवनीय आदि अग्‍नियोंको अपनी आत्मामें लीन कर ले। ‘मैंपन’ और ‘मेरेपन’ का त्याग करके शरीरको उसके कारणभूत तत्त्वोंमें यथायोग्य भलीभाँति लीन करे॥ २४॥

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