kāraṇeṣu nyaset samyak saṃghātaṃ tu yathārhataḥ|| 24
अर्थ
अनशनके पूर्व ही वह अपने आहवनीय आदि अग्नियोंको अपनी आत्मामें लीन कर ले। ‘मैंपन’ और ‘मेरेपन’ का त्याग करके शरीरको उसके कारणभूत तत्त्वोंमें यथायोग्य भलीभाँति लीन करे॥ २४॥
आत्मन्यग्नीन् समारोप्य संन्यस्याहंममात्मताम्।
कारणेषु न्यसेत् सम्यक् संघातं तु यथार्हतः॥ २४
अनशनके पूर्व ही वह अपने आहवनीय आदि अग्नियोंको अपनी आत्मामें लीन कर ले। ‘मैंपन’ और ‘मेरेपन’ का त्याग करके शरीरको उसके कारणभूत तत्त्वोंमें यथायोग्य भलीभाँति लीन करे॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.12.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 882) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/12/24/