श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.14.29

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

यत्र यत्र हरेरर्चा स देशः श्रेयसां पदम्।

यत्र गङ्गादयो नद्यः पुराणेषु च विश्रुताः॥ २९

yatra yatra harerarcā sa deśaḥ śreyasāṃ padam|

yatra gaṅgādayo nadyaḥ purāṇeṣu ca viśrutāḥ|| 29

अर्थ

जिनमें यह सारा चर और अचर जगत् स्थित है, उन भगवान्‌की प्रतिमा जिस देशमें हो, जहाँ तप, विद्या एवं दया आदि गुणोंसे युक्त ब्राह्मणोंके परिवार निवास करते हों तथा जहाँ-जहाँ भगवान्‌की पूजा होती हो और पुराणोंमें प्रसिद्ध गंगा आदि नदियाँ हों, वे सभी स्थान परम कल्याणकारी हैं॥ २८-२९॥✎ 640 641

यह अर्थ श्लोक 28–29 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #640 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #641 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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