श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.14.37

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

पुराण्यनेन सृष्टानि नृतिर्यगृषिदेवताः।

शेते जीवेन रूपेण पुरेषु पुरुषो ह्यसौ॥ ३७

purāṇyanena sṛṣṭāni nṛtiryagṛṣidevatāḥ|

śete jīvena rūpeṇa pureṣu puruṣo hyasau|| 37

अर्थ

उन्होंने मनुष्य, पशु-पक्षी, ऋषि और देवता आदिके शरीररूप पुरोंकी रचना की है तथा वे ही इन पुरोंमें जीवरूपसे शयन भी करते हैं। इसीसे उनका एक नाम ‘पुरुष’ भी है॥ ३७॥

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